हिन्दुस्तान जिंक की 46 वीं वार्षिक आमसभा
कंपनी को सर्वोत्तम सीएसआर, एक्सपोर्ट प्रमोशन एवं उद्योग पुरस्कार

उदयपुर। वर्ष 2011-12 में कंपनी ने अधिकतम उत्पादन, चाँदी धातु की प्रभावी बिक्री, प्रचालन दक्षता व भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन के बावजूद राजस्व अर्जन तथा लाभ में प्रभावी प्रगति दर्ज की है। ये विचार वेदांता समूह की जस्तात-सीसा एवं चांदी उत्पािदक कंपनी हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य  कार्यकारी अधिकारी अखिलेश जोशी ने व्यक्त‍ किए।

वे कंपनी के प्रधान कार्यालय सभागार में 46 वीं वार्षिक आम बैठक में कंपनी के अंशधारियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि वर्ष के दौरान राजस्व अर्जन मूल्य हृास, ब्याज व कराधान से पूर्व लाभ वर्ष के दौरान क्रमश: 11,405 करोड़ रुपए तथा 7,569 करोड़ रुपए रहा जो गत वर्ष की तुलना में क्रमश: 14 प्रतिशत एवं 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। कंपनी का नकदी तौर पर समृद्ध तुलन पत्र रहा। हमारे पास नकदी एवं नकदी के समतुल्य धन राशि उल्लेखनीय है एवं वर्तमान में निवेश 17,948 करोड़ रुपए का है।
उन्होंने शेयरधारकों को बताया कि कंपनी वर्ष के दौरान जस्ता, सीसा तथा चाँदी का अब तक का सर्वाधिक उत्पादन अर्जित किया है। 7,59,000 टन परिशोधित जस्ता धातु का उत्पादन 6 प्रतिशत अधिक रहा जो राजस्थान में नई पीढ़ी के अत्याधुनिक प्रद्रावकों की क्षमता के अधिकाधिक प्रयोग के कारण हुआ तथा चौथी तिमाही में जिंक स्मेल्टर में उत्पादन रोकने के कारण आंशिक तौर पर प्रभावित रहा। उत्पादन क्षमता में वृद्धि तथा सिन्देसर खुर्द खान के प्रचालन से वित्तीय वर्ष 2012 में 99 हजार टन परिशोधित सीसा धातु तथा 242 टन चांदी का रिकार्ड उत्पादन किया जो गत वर्ष की तुलना में क्रमश: 56 प्रतिशत एवं 35 प्रतिशत अधिक है।
जोशी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2012 सीसा धातु एवं चाँदी का वर्ष रहा है। कंपनी ने दरीबा में एक लाख टन की वार्षिक उत्पादन क्षमता के नवनिर्मित सीसा उत्पादन संयन्त्र में प्रचालन आरम्भ किया तथा कंपनी की वार्षिक सीसा उत्पादन क्षमता का 1,85,000 टन तक विस्तार किया। इससे कंपनी देश की कुल सीसा धातु की मांग की दो-तिहाई आपूर्ति करेंगी। एक नये चाँदी परिशोधन संयन्त्र में भी चाँदी का उत्पादन आरम्भ कर दिया जिससे प्रतिवर्ष 500 टन चाँदी के उत्पादन की क्षमता अर्जित कर दुनिया के पहले दस चांदी उत्पादकों में सम्मिलित हो चुके हैं। वर्ष के दौरान सिन्देसर खुर्द खान में बीस लाख टन अयस्क उत्पादन क्षमता अर्जित कर ली तथा ग्रीन फील्ड कायड़ खदान एवं रामपुरा-आगूचा खान में भूमिगत खान विकास कार्य आरम्भ कर दिये हैं। कंपनी ने हरित ऊर्जा के क्षेत्र में 102 मेगावाट का पवन ऊर्जा विस्तार कार्य पूरा किया तथा 274 मेगावाट पवन ऊर्जा उत्पादन की क्षमता अर्जित कर देश के सबसे बड़े पवन ऊर्जा उत्पादक बन गये हैं तथा 5000 वर्ग किमी से अधिक क्षेत्र में सक्रिय समन्वेषण करते हुए दीर्घावधि संपोषणीयता को ध्यान में रखकर हम समूचे देश में खनिजों की खोज में प्रयासरत हैं।
कम्पनी के प्रगति एवं विकास के विजन के क्रम में नये विश्वस्तरीय अयस्क भण्डारों की खोज करने में निवेश बनाये रखा तथा खदानों एवं अन्य विविध समन्वेषण स्थलों व संभावी क्षेत्रों मं  कुल 94,950 मीटर कोर तथा नान—कोर वेधन कार्य पूरा किया। 8.04 मिलियन टन अवक्षय से पूर्व अयस्क भण्डारों एवं संसाधनों में सफलतापूर्वक 27.1 मिलियन टन की वृद्धि की। 31 मार्च 2012 तक कंपनी के कुल अयस्क भण्डार 332.3 मिलियन टन है जिसमें 35 मिलियन टन जस्ता-सीसा धातु एवं 912 मिलियन आउन्स चांदी विद्यमान है तथा खदानों की प्रचालन आयु 25 वर्ष है। जोशी ने कहा कि हमें पूरा विश्वास है कि कंपनी के अयस्क भण्डारों एवं संसाधनों में और वृद्धि होगी तथा कम्पनी की संपोषणीयता एवं प्रगति और पुख्ता होगी।
जोशी ने बताया कि जल संरक्षण के हमारे संकल्पित प्रयासों के फलस्वरूप पिछले चार वर्ष में हमारे प्रद्रावकों में जल की खपत में विशिष्ट कमी की है जो 23 प्रतिशत है। इसी प्रकार खानों में 10 प्रतिशत कमी हुई है।
उदयपुर में परिशोधन संयंत्र
कंपनी ने उदयपुर शहर में निस्तारित जल परिशोधन सयंत्र की स्थापना का कार्य आरंभ किया है जिसमें बीस हजार घन मीटर प्रतिदिन की जल परिशोधन क्षमता है। इससे पानी की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा शोधित जल का कम्पनी अपने प्रचालनों ने प्रयोग करेगी। हमारे अपशिष्टों के विषैलेपन को कम करने तथा गुणवत्ता सुधारने के प्रति कटिबद्ध हैं तथा पर्यावरण को लाभान्वित करने वाले उपागमों के मद्देनजर परिशोधित जल के पुन: प्रयोग को तत्पर हैं। आईएसएफ अवपकं, प्रचालनों से उत्पन्न फ्लाई एश एवं बोटम एश का प्रयोग सीमेन्ट एवं ईंटों के निर्माण में होता है। इस वर्ष शत-प्रतिशत फ्लाई एश एवं आईएसएफ अवपकं का प्रयोग सीमेन्ट उत्पादन उद्योगों में किया गया है। हिन्दुस्तान जिंक एशिया में सबसे पहली कम्पनी है जहां जेरोफिक्स नामक अधुनातन तकनोलोजी का प्रयोग करके जेरोसाइट स्थिरीकरण किया गया है। जेरोसाइट के सडक़ निर्माण में एवं सीमेन्ट उद्योग में उपयोग के क्षेत्र में किये गये विस्तृत अनुसंधान एवं विकास के सकारात्मक परिणाम आये हैं जिससे इसका लाभकारी अनुप्रयोग हो पाएगा।
जोशी ने बताया कि कंपनी के निदेशक मण्डल ने दो रुपए के प्रत्येक इक्विटी शेयर पर नब्बे पैसे प्रति शेयर के हिसाब से 45 प्रतिशत समग्र लाभांश की घोषणा की है। यह वित्तीय वर्ष 2012 का 120 प्रतिशत कुल लाभांश है जो 2.40 रुपए प्रति शेयर है व कम्पनी द्वारा अब तक प्रस्तावित लाभांश का सर्वाधिक है।
मिले कई पुरस्कांर
जोशी ने शेयरधारकों को बताया कि हमें अत्यन्त प्रसन्नता कि रिपोर्टधीन वर्ष के दौरान कार्यकलापों एवं प्रयासों को बाहरी अभिकरणों ने सराहा है, जो हमारे लिए गर्व की बात है। वर्ष के दौरान हमें प्रचालन उत्कृष्टता, गुणवत्ता, निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व तथा स्वास्थ्य, सुरक्षा-पर्यावरण के क्षेत्र में हमें कई पुरस्कार-सम्मान मिले जैसे आईएमसी रामकृष्ण बजाज राष्ट्रीय गुणवत्ता पुरस्कार-निष्पादन उत्कृष्टता ट्राफी, सेप-एसीई अवार्ड-2011-उत्कृष्ट सूचना टेक्नोमलोजी उपक्रम, सर्वोत्कृष्ट प्राक्स कम्पास अवार्ड—2011, एसोचेम सीएसआर एक्सीलेन्स अवार्ड-2012, नवाचरित पर्यावरण परियोजना आवार्ड, सीआईआई एनवायरमेन्टल बेस्ट प्रेक्टिसेज अवार्ड-2012 तथा राजस्थान ऊर्जा संरक्षण पुरस्कार-2011.
जोशी ने कहा कि मैं कंपनी के निदेशक मण्डल की ओर से एवं मेरी तरफ से मैं हमारे सभी कर्मचारीगण एवं कामगार बन्धुओं तथा कामगार फेडरेशन द्वारा दिये जा रहे निरन्तर सहयोग एवं सहकार की हृदय से प्रशंसा करता हूँ जिससे कम्पनी को सफलता मिली है।
बैठक में हिन्द जिंक के मुख्य वित्तीय अधिकारी अमिताभ गुप्ता,  कंपनी के निदेशक ए. आर. नारायणस्वामी, राष्ट्रपति के प्रतिनिधि प्रमोद चन्द्र तथा कंपनी सचिव राजेन्द्र पण्डवाल उपस्थित थे।