रेयान इण्टरनेषनल स्कूल में बिईंग सेफ वर्कषॉप

उदयपुर। रेयान इण्टरनेषनल सीनियर सेकण्डरी स्कूल में गुरूवार को आयोजित बिईंग सेफ वर्कषॉप में लगभग 80 से अधिक बच्चों ने सुरक्षा के प्रति जागरूकता का संकल्प लिया। हिन्दुस्तान जिं़क के हेड कार्पोरेट कम्यूनिकेषन एवं बिईंग सेफ के फाउण्डर पवन कौषिक इन बच्चों से मिलने और इनके साथ इन्टरेक्षन के लिये रेयान इण्टरनेषनल स्कूल पहुंचे।

इस वर्कषॉप में पवन कौषिक ने बच्चों से बातचीत के दौरान कहा कि सुरक्षा नियमों के प्रति लापरवाही जीवन के लिए खतरा हो सकता है। जीवन अमूल्य होता है सुरक्षा नियमों को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। माता-पिता के सपने आपके सपनों के साथ जुड़े हुए हैं और उनके सपनों को साकार करने के लिए आपका सुरक्षित होना आवष्यक है। सुरक्षा के प्रति जागरूकता से खुद एवं परिवार सुरक्षित होगा, बच्चों को अपने से बड़ों, अध्यापकों एवं परिवार के हर बडे सदस्य की बात माननी चाहिए। विषेष रूप से इस उम्र में सडक सुरक्षा के लिये ट्राफिक नियमों की पालना, हेलमेट पहनना, बिना लाईसेंस वाहन नहीं चलाना, सुनिष्चित करना होगा। इस अवसर पर उन्होंने बच्चों से संवाद के लिये प्रजेन्टेषन के माध्यम से एक कहानी भी प्रस्तुत की जिसमें बच्चों की जिद और माता पिता की अपेक्षा दर्षाया गया था जिसे बच्चों ने खूब पसंद किया और उसकी गहराई को समझा, साथ ही विचार-विमर्ष भी किये।
पवन कौषिक ने बताया कि प्रति वर्ष भारत में लगभग एक लाख पच्चास हजार लोगों की किसी न किसी सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है और यह भी देखा गया है कि लापरवाही से चलाने वाले वाहनों से बेकूसरों की जान चली जाती हैं। इन सब से बचने का एक ही तरीका है कि अपनी खुद की सुरक्षा और परिवार की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाए।
इस अवसर पर प्रधानाचार्या एवं अध्यापिकाओं ने इस वर्कषॉप को लाभदायक बताया। बिईंग सेफ प्रोजेक्ट के माध्यम से पवन कौषिक ने अब तक करीब ढाई हजा़र से अधिक बच्चों और परिजनों से मिल चुके है, जिसके अन्तर्गत लघु फिल्म, प्रजेन्टेषन और कहानी के माध्यम से बच्चों को स्वयं और परिवार को सुरक्षित रखने की जाानकारी दी जा रही है।
बिईंग सेफ के फाउण्डर पवन कौषिक ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का उद्धेष्य सडक, घर या कार्यस्थल के हर स्थान पर सुरक्षा के प्रति जागरूक रहना है, सुरक्षा नियम सुरक्षा के लिए बनाये जाते हैं सभी को सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए जिससे परिजनों और बच्चों के स्वयं के मन में सुरक्षा के लिये प्रतिबद्धता उत्पन्न हो।